जीवात्मा कर्म करने के लिए स्वतंत्र और फल पाने के लिए परतंत्र है: दया निधि आर्य
गोड्डा, सितम्बर 7 -- मेहरमा, एक संवाददाता। बिना कर्ता के कोई क्रिया नही हो सकती है। पेड़,पौधा बढ़ते रहते है।सुर्य,चन्द्रमा अपने नियत समय पर उगते और डूबते हैं।पृथ्वी सूर्य का और चन्द्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाते रहता है।यह सब परमात्मा करते हैं।
परमात्मा और कर्म उक्त बातें आर्य समाज के वैदिक पुरोहित विद्यानिधि आर्य ने रविवार को आर्य समाज मंदिर चपरी में सार्वजनिक रूप से आयोजित साप्ताहिक वैदिक हवन यज्ञ के पश्चात प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि परमात्मा सर्वशक्तिमान हैं। वह बिना शरीर धारण किये सारा काम करते हैं।परमात्मा के पास अनंत ज्ञान और अनंत बल है। जीवात्मा अल्पज्ञ है।इसलिए परमात्मा ने उसे शरीर दिया। ताकि वह कर्म कर सके और उसे भोग सके।स्थूल शरीर प्रतिदिन क्षय अर्थात नष्ट होता है।यह मनुष्य को समझना चाहिए। स्थूल शरीर दिखता है,सुक्ष्म शरीर...
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