मिर्जापुर, मई 10 -- जिगना। क्षेत्र के परमानपुर गांव में गंगा तट पर चल रही संगीतमय भागवत कथा के छठवें दिन व्यास पं. विष्णु धर द्विवेदी ने रास के रहस्य को बतलाते हुए कहा कि यह जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है। जीवात्मा और परमात्मा बीच में आवरण रूपी पट का आहरण करके कृष्ण जी ने रास किया। कृष्ण और बलराम मथुरा में प्रवेश करते हैं, तब परशुराम जी के द्वारा प्रदत्त धनुष भंजन करते हैं। जिससे कंस की घबराहट बढ़ जाती है। 11 वर्ष 56 दिन की आयु में श्रीकृष्ण ने मामा कंस का उद्धार किया। माता-पिता को कारागार से मुक्त कराया। नाना उग्रसेन को कारागार से मुक्त कर राज्य प्रदान किया। इसके बाद सांदीपनि आश्रम में अल्पकाल में ही संपूर्ण विद्या का अध्ययन करके सुदामा से मित्रता स्थापित किया। ज्ञान अकेला है तब तक कोई महत्व नहीं है। ज्ञान के साथ प्रेम भी आवश्यक है। तभी...
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