जीवन में संसारिक सुखों की चाहत ही दु:खों का कारण
बलिया, मार्च 23 -- सिकंदरपुर, हिन्दुस्तान संवाद। पं. आदित्य शक्ति तिवारी ने कहा कि एक बार सुखदेव जी ने अपने पिता महर्षि वेदव्यास से प्रश्न किया कि इस संसार में वास्तविक सुखी कौन है। इस पर महर्षि वेदव्यास ने बताया कि मनुष्य के जीवन में चाहत ही दुखों का कारण है। जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य अपनी इच्छाओं और लालसाओं के कारण ही दु:ख भोगता है। यदि मनुष्य की चाह सांसारिक सुखों के बजाय भगवान के प्रति हो जाए तो उसके जीवन में आनंद और शांति का वास हो जायेगा। लेकिन पिता की ज्ञानपूर्ण कथा सुनने के बाद भी सुखदेव जी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए और वह आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए राजा जनक के पास जाकर शिक्षा ग्रहण किया। ऐसे में कथा का श्रवण करना तभी सार्थक होगा जब उसे विश्वास के साथ सुनकर जीवन में उतारें। बहेरी-मासूमपुर गांव में चल रहे शतचंडी महायज्ञ एवं मा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.