जीवन में संयम और सात्विकता से ही वास्तविक सुख: मुनि श्री
गिरडीह, अगस्त 10 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। जीवन में संयम और सात्विकता अपनाकर ही वास्तविक सुख, स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है। सात्विक आहार न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को निर्मल बनाकर साधना को भी सफल बनाता है। उक्त बातें मधुबन स्थित गुणायतन में साधनारत राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने प्रवचन सभा में कही।
सात्विक आहार का महत्व गुणायतन में साधनारत मुनिश्री ने कहा कि यदि जीवन को सुंदर, स्वस्थ और संतुलित बनाना है तो भोजन में सात्विकता को अपनाना आवश्यक है। वास्तविक स्वाद मिर्च-मसालों और कृत्रिम फ्लेवर में नहीं, बल्कि प्राकृतिक सात्विकता में है। प्रत्येक खाद्य पदार्थ का अपना स्वाभाविक स्वाद होता है। जब व्यक्ति प्राकृतिक स्वाद का आनंद लेना सीख जाता है, तब उसे कृत्रिम स्वादों की आवश्यकता महसूस नहीं होती। मुनिश्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.