रांची, अप्रैल 13 -- रांची, प्रमुख संवाददाता। कथावाचक मां चैतन्य मीरा ने कहा कि सच्ची मित्रता में पद, प्रतिष्ठा या वैभव का नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और आत्मीयता का महत्व होता है। जीवन में अगर मित्रता करनी है तो श्रीकृष्ण-सुदामा की तरह करें। वह कथावाचक सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन न्यास की ओर से चुटिया की पोद्दार धर्मशाला में सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सातवें दिन प्रवचन कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सुदामा एक प्रतीक हैं। सुदामा चरित्र प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भगवत प्राप्ति की व्याकुलता अगर जीवन में आ गई है तो यह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह भी पढ़ें- चुटिया में रुक्मणी विवाह के प्रसंग पर झूमे श्रद्धालु मनुष्य को स्वयं पर और अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रख कर द्वंद्वों से ऊपर उठ कर स्वकर्तव्य को पूरा करना...
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