जीवन में क्रोध का त्याग कर समता धारण करें
बागपत, जून 6 -- नगर के अजीत नाथ सभागार धर्म सभा आयोजित की गई। जिसमें जैन मुनि विनिश्चय सागर महाराज ने प्रवचन किया। प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों की उपस्थिति। यह भी पढ़ें- संयमी जीवन से ही राष्ट्र निर्माण संभव: विनिश्चय सागरक्रोध का महत्व विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि आज गृहस्थ जीवन में प्रेम की जगह कलह, क्रोध ने अपना स्थान बना लिया है। आपके भीतर का अहंकार, भीतर की आकांक्षा बाहर क्रोध के रूप में प्रकट होती है तो प्रीति समाप्त हो जाती है और कलह का जन्म हो जाता है। सच कहा जाए तो चारों ओर कषाय हमारे लिए खतरनाक है पर क्रोध एक धधकता अंगारा है उसकी प्रचंड ज्वाला में सारे धर्म स्वाहा हो जाते हैं। हमे अपने जीवन में क्रोध छोड़कर समता धारण करनी चाहिए। क्रोध के अंगारे को बुझाने के लिए क्षमा का नीर आवश्यक है। भगवान महावीर स्वामी...
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