जीवन जीने की शैली है श्रीमद् भागवत : स्वामी लक्ष्मणाचार्य
छपरा, मई 19 -- सोनपुर। गजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार की शाम प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अपने प्रवचन में कहा कि "श्रीमद्भागवत केवल ग्रन्थ नहीं, अपितु जीवन जीने की शैली है।यदि मानव जीवन से शास्त्र को हटा दिया जाए तो मनुष्य और पशु का अंतर मिट जाएगा। शास्त्र से ही धर्म का ज्ञान होता है, और धर्म ज्ञान ही मनुष्य को पशु से पृथक करता है। धर्म ज्ञान के अभाव में मनुष्य पशुवत व्यवहार करने लगता है।" उन्होंने वृद्धावस्था का चित्रण करते हुए कहा कि "मृत्यु के दूत का नाम ही 'काल' है। वृद्धावस्था में अंग शिथिल हो जाते हैं, बाल पक जाते हैं, मुख में एक दांत भी नहीं रहता। वृद्ध लाठी के सहारे चलता है, फिर भी आशा उसका पीछा नहीं छोड़ती।...
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