जीवन जीने की कला सिखाता है धर्म: भाव भूषण
मेरठ, जून 20 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में 31 वें दिन श्रद्वालुओ ने बढ़ चढ़कर भाग लिया तथा पूजा अर्चना की और पुण्य अर्जन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकर भगवंतों का जलाभिषेक कर किया। शांतिधारा करने का सौभाग्य मुदित जैन, सतेंद्र जैन, पारस हर्षित आदि आदि को प्राप्त हुआ। विधान में भाव भूषण महाराज ने कहा कि जन्म लेना और जीवन जीना दोनों में अंतर होता है। जन्म तो पशु पक्षी आदि भी लेते है लेकिन जीवन जीने की कला मनुष्य को ही आती है। आज हम इस कला को भूल रहे है हमें अपने जीवन का मकसद ही नहीं पता। इसलिए मनुष्य को सदमार्ग पर चलकर ही लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। हमें आधुनिक चकाचैंध से निकलकर आत्मा की दुनिया में रमना होगा। सांयकाल भगवंतों की आरती की ...
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