वाराणसी, फरवरी 26 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। कविता मनुष्य के सामूहिक व्यवहार की अभिव्यक्ति है। यही वजह है कि यह जीवन के हर क्षेत्र में पाई जाती है। कविता ही वह विधा है जो समाज में लोकतांत्रिक स्पेस को बचाए रहती है। ये बातें बीएचयू के हिंदी विभाग के प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहीं। वह बुधवार को ख्यात कलाविद् प्रो.शंखो चौधरी की 110वीं जयंती पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि थे। सामने घाट के महेश नगर स्थित राम छाटपार शिल्प न्यास सभागार में हुए आयोजन में उन्होंने कहा कि कवि होना स्वाधीन होना है। इसी स्वाधीनता के दायरे में कविता समाज को दिशा देती है। मनुष्य के भावबोध को जाग्रत करती है। उन्होंने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया। गज़लकार शिवकुमार पराग ने कहा कि कविता हमें विचलन से बचाती है। उन्होंने 'तिनका तिनका जुटा के लाती रही','इतना खतरा तो चलो ...
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