नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- बैसाख के महीने में पेड़-पौधों में नई कोपलें निकलनी शुरू हो जाती हैं। इनमें एक नई जिंदगी की शुरुआत होती है। हमें भी इससे कुछ नया सबक लेना चाहिए, जिससे कि हमारे जीवन में भी नई कोपलें फूटें। हमारी नई जिंदगी का आरंभ हो। हमारे दिल से सभी भेदभाव मिट जाएं।वैसाख धीरन किउ वाढीआ जिना प्रेम विछोह महापुरुष जब इस दुनिया में आते हैं, वे एक ही बात को बार-बार कहते हैं कि मनुष्य जन्म बड़े भागों से मिलता है। सिर्फ इसके माध्यम से हम अपने पुराने घर यानी परमात्मा के पास वापस जा सकते हैं। परमात्मा प्रेम है और हमारी आत्मा उसका अंश होने के नाते प्रेम है। इसमें कुदरती तौर से प्रभु से मिलने का भाव है।'वैसाख धीरन किउ वाढीआ जिना प्रेम विछोह।' बैसाख का महीना आ गया है, फसल कटी पड़ी है तुम्हारी। तुम प्रभु से दूर पड़े हो। उसके बगैर तुम्हें धीरज क...