जीवनीकार को तथ्यों की कल्पना नहीं करनी चाहिए
वाराणसी, जुलाई 23 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू के हिंदी विभाग एवं अंतर-सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र की ओर से 'अज्ञेय: व्यक्तित्व एवं कृतित्व' विषयक दो दिनी व्याख्यान शृंखला का बुधवार को समापन हुआ।
कार्यक्रम का सारांश केंद्र के महामना सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता होमी भाभा फेलो अक्षय मुकुल ने कहा कि जीवनीकार को कल्पनाशील अवश्य होना चाहिए लेकिन तथ्यों की कल्पना नहीं करनी चाहिए। जीवनी की विश्वसनीयता दस्तावेजों और प्रमाणों पर आधारित होती है। उन्होंने नायकत्व के संकट और जीवनी लेखन की प्रासंगिकता पर कहा कि मनुष्य में दूसरे मनुष्य के जीवन को जानने की जिज्ञासा कभी समाप्त नहीं होती। इसलिए जीवनी लेखन की परंपरा भी निरंतर जीवित रहेगी। प्रो.रामाज्ञा राय की ओर से अज्ञेय की जीवनी के लिए व्यापक शोध, निजी अभिलेखों तक पहुंचने की प्रक्रि...
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