जीवकान्त ने नारी विमर्श को दी नई दिशा
दरभंगा, जुलाई 28 -- राजीव रंजन झा,दरभंगा। लनामिवि के पीजी मैथिली विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार कर्ण की अध्यक्षता में 'जीवकान्त के उपन्यास में नारी चेतना' विषय पर साहित्यिक विमर्श का आयोजन किया गया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. कर्ण ने कहा कि जीवकान्त आधुनिक मैथिली साहित्य के महत्त्वपूर्ण उपन्यासकार हैं। उनके उपन्यासों में मिथिला का सामाजिक यथार्थ, बदलते जीवन-मूल्य, वर्ग-संघर्ष, ग्रामीण संस्कृति तथा विशेष रूप से नारी जीवन का बहुआयामी चित्रण मिलता है। जीवकान्त की रचनाओं में नारी केवल सहायक पात्र नहीं, बल्कि चेतनासंपन्न, संघर्षशील एवं आत्मसम्मान से परिपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में उपस्थित है。
नारी-विमर्श पर नए दृष्टिकोण प्रो. दमन कुमार झा ने कहा कि जीवकान्त के उपन्यास आधुनिक मैथिली साहित्य में नारी-विमर्श को नई दिशा प्रदान करते हैं। उ...
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