वाराणसी, जुलाई 23 -- जक्खिनी, संवाद। सब्जियों की खेती को बदलते मौसम के अनुकूल बनाने और उनकी पौष्टिकता बढ़ाने के लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) में एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की गई है।

परियोजना का विवरण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना में आधुनिक जीनोम एडिटिंग (जीन संपादन) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक जीएम या पराजीनी (ट्रांसजेनिक) फसलों से पूरी तरह अलग है। इसमें बाहर से कोई जीन नहीं डाला जाता, बल्कि पौधे के अपने ही जीन में बहुत सूक्ष्म बदलाव किया जाता है - ठीक वैसे ही जैसे प्रकृति में स्वयं होता है। यही कारण है कि भारत सरकार ने वर्ष 2022 में इस श्रेणी (एसडीएन-1 व एसडीएन-2) की फसलों को ट्रांसजेनिक फसलों जैसी कड़ी नियामक प्रक्रिया से छूट दे रखी है। जापान सहित कई देशों में जीनो...