जिस नक्सलबाड़ी में जन्म लिया, वहीं दम तोड़ने के कगार पर नक्सलवाद
जमशेदपुर, अगस्त 21 -- पश्चिम बंगाल के जिस नक्सलबाड़ी से 1967 में सशस्त्र नक्सल आंदोलन की चिंगारी उठी थी, करीब छह दशक बाद उसी क्षेत्र में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। नक्सलबाड़ी से शुरू होकर जंगलमहल, देश के 9 राज्यों के 126 जिलों, झारखंड के पारसनाथ और सारंडा होते हुए ओडिशा तक फैला नक्सली प्रभाव जंगलमहल में छोटे दस्ते तक सिमटकर रह गया है। सुरक्षा एजेंसियों के लगातार अभियानों ने संगठन के नेतृत्व, हथियारबंद दस्तों और सुरक्षित ठिकानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। वर्ष 1967 में दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी इलाके में किसानों के भूमि विवाद और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन ने सशस्त्र रूप लिया। चारू मजूमदार, कानू सान्याल और जंगल संथाल इसके प्रमुख चेहरों में रहे। मई 1967 में पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन को देशभर में पहचान मिली और नक्सल...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.