रांची, मई 25 -- झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों के मामले में स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी का वेतनमान और सेवा शर्तें उसके औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी होने की तारीख से नहीं, बल्कि उस विज्ञापन और चयन प्रक्रिया की तारीख से तय होंगी, जिसके तहत भर्ती शुरू की गयी थी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दुमका और जामताड़ा जिले के जनसेवकों (ग्राम सेवक) से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक देरी या लेट-लतीफी के कारण अगर किसी उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र देर से मिलता है, तो उसे इसके लिए दंडित नहीं किया जा सकता। उम्मीदवारों को एक ही विज्ञापन और एक ही मेधा सूची (पैनल) से चुने जाने के बावजूद सिर्फ अलग-अलग चरणों में नियुक्ति पत्र मिलने के आधार पर दो अलग-अलग वेतनमानों में बांटना पूरी तरह से असंवैधानिक और समानत...