नई दिल्ली, अक्टूबर 4 -- क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जिस काम को एक घंटे में निपटा सकते थे वह पूरी दोपहर खा जाता है? किताब खोली और दो मिनट बाद फोन हाथ में आ गया। ईमेल लिखने बैठे और बीच में कुछ और देखने लगे। शाम तक थकान सिर पर चढ़ गई पर काम आधा ही हुआ। उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर राज शमानी का कहना है कि इसकी जड़ आलस नहीं है। असली गुनहगार बार-बार का ब्रेक हो सकता है। राज शमानी ने अपनी ताजा लिंक्डइन पोस्ट में एक सीधा सवाल पूछा। एक घंटे का काम आपको चार घंटे का क्यों लगता है? उनके मुताबिक हम सब जानते हैं कि काम जल्दी निपट सकता है। जिस दिन बिना रुके बैठ जाते हैं उस दिन वह उम्मीद से कहीं कम वक्त में खत्म हो जाता है। फिर बाकी दिनों में वही काम इतना लंबा क्यों खिंचता है?रिसर्च क्या कहती है शमानी ने अपनी बात के लिए एक पुरानी रिसर्च का हवाला दिया। यह...