सिमडेगा, अप्रैल 6 -- जलडेगा, हलधर प्रसाद हुनर कभी सुविधाओं का मोहताज नहीं होता। अगर आपके पास आइडिया है और कुछ कर गुजरने की हिम्मत है तो कबाड़ भी सोना बन सकता है। इस बात को जलडेगा के एक छोटे से गाँव के तीन आदिवासी किशोरों ने जुगाड़ साइकिल बनाकर जीता-जागता सबूत दिया है। साथ ही इस बात को गलत साबित कर दिया कि आविष्कार सिर्फ आलीशान लैब में होते है। कभी उग्रवाद के साये में रहने वाले जंगलो पहाड़ों के बीच बसा मामा भगिना गांव के विल्सन तोपनो, रोयन तोपनो और अमित तोपनो ने अपनी क्रिएटिविटी और जुगाड़ टेक्नोलॉजी के दम पर एक ऐसी अनोखी साइकिल तैयार की है जिसे देखकर बड़े-बड़े इंजीनियर भी अपना सिर खुजलाने लग जाएँगे। यह कोई आम साइकिल नहीं है। इसकी लंबाई सामान्य साइकिल से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा है। लड़कों ने इसे बनाने में किसी शोरूम का नहीं बल्कि कबाड़ का सहा...