मिर्जापुर, अप्रैल 20 -- हलिया। हथेड़ा गांव में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित विष्णु धर द्विवेदी ने ध्रुव चरित्र, जड़भरत और भक्त प्रहलाद की कथाओं का संक्षिप्त वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य की मति ही उसकी गति तय करती है, इसलिए जीवन में सदैव सद्बुद्धि और हरि स्मरण आवश्यक है। कथा सुनकर सैकड़ों श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। बुद्धि हमेशा सुंदर नीति वाली हो जिससे व्यक्ति का सदा सर्वदा कल्याण हो सके। इसके बाद पुरंजनोपाख्यान की कथा को सुनाते हुए बहुत ही अद्भुत जड़भरत की कथा को श्रवण कराते हुए बताया कि अंत में जो व्यक्ति की मति होती है, वही गति का कारण होता है। चाहे वह जडभरत जी हों, चाहे अजामिल हो, मरते वक्त हिरण का चिंतन किया, जिससे उनको हिरण की योनि प्राप्त हुई। अजामिल जैसा पापी अपने बेटे को बुलाया, लेकिन नारायण की गति प...