उरई, जनवरी 7 -- उरई। बीते वर्ष सात नवंबर को कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी जिले में कुत्तों की धर पकड़ को लेकर कोई बड़ी पहल नहीं दिखाई दी है जिसका नतीजा यह है कि ऐसा कोई दिन नहीं जाता कि जिस दिन जिले में तकरीबन 50 लोग कुत्ते के काटे जाने का शिकार होकर जिला अस्पताल या फिर सीएचसी और पीएचसी में रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए ना पहुंच रहे हो जबकि काफी संख्या में लोग प्राइवेट डॉक्टर के पास भी जा रहे हैं। बीते दिसंबर माह में जिले में करीब 1850 लोगों को रेबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ा है जिसमें 173 गंभीर केस रहे हैं और जिसमें मरीज को सीरम भी लगाया गया। शहर की सड़कों और गलियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुत्तों का आतंक है। जिले में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क व गलियों तक में आवारा कुत्तों की संख्या बेहिसाब है। कई क्षेत्रों में आवारा कुत...