बांका, मार्च 17 -- बांका, निज प्रतिनिधि। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत जिले की 182 पंचायतों में शुरू की गई कचरा उठाव योजना दम तोडती नजर आ रही है। घरों में नीली व हरी बाल्टियां भी बांटी गई थी, लेकिन वर्तमान समय में ये बाल्टियां उपयोग के बजाय घरों की शोभा बढाने की वस्तु बनकर रह गई है। घर-घर से ठोस और तरल कचरा उठाकर उसे अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (डब्लूपीयू) तक पहुंचाने की शानदार रूपरेखा बनी थी। लेकिन, आज जमीनी हकीकत इससे उलट है। जिले के अधिकांश प्रखंडों में कचरा उठाव का काम या तो बेहद धीमी गति से चल रहा है या पूरी तरह ठप पडा है। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि कहीं टूटे हुए उपकरणों की मरम्मत के लिए फंड नहीं है, तो कहीं स्वच्छता कर्मियों को महीनों से मानदेय के लाले पडे हैं। डोर टू डोर उपलब्ध कराई गई नीली और ह...