लखीसराय, अप्रैल 7 -- मनोज कुमार, लखीसराय कहने को तो लखीसराय को जिला बने एक दशक से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर आज भी अपनी बुनियादी पहचान और जल निकासी के लिए सिसक रहा है। जिस शहर को आधुनिक और व्यवस्थित होना चाहिए था वह आज कंक्रीट के जाल और अतिक्रमण की राजनीति के बीच दम तोड़ रहा है। हर वर्ष बरसात के मौसम में शहरवासियों को जलजमाव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि हल्की बारिश भी शहर के लिए आफत बन जाती है। न्यायालय परिसर से लेकर सदर अस्पताल तक पानी भर जाता है और गली मोहल्लों में रहने वाले लोग घरों में कैद हो जाते हैं। शहर की यह स्थिति विकास के उन तमाम दावों की पोल खोल रही है जो चुनावी रैलियों में किए जाते हैं। अगर जल्द ही तालाबों को पुनर्जीवित नहीं किया गया और अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चला तो ...
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