मुजफ्फरपुर, मई 19 -- मुजफ्फरपुर। गोदभराई, अन्नप्राशन जैसे सामाजिक सरोकारों की बुनियाद पर पांच दशक पहले एक ऐसे केंद्र की कल्पना की गई, जहां न सिर्फ बच्चों को अक्षर ज्ञान, बल्कि उनके पोषण सहित संस्कारों के बीज से उन्हें पल्लवित-पुष्पित करना था। इस केंद्र की महती जिम्मेवारी दी गई आंगनबाड़ी केन्द्र की सेविका और सहायिकाओं को। कई स्तरों पर समस्याओं से जूझते हुए ये आज भी अपने दायित्व का निर्वहन कर रही हैं। इनका कहना है कि मजदूरों से भी कम मेहनताना मिलता है, वह भी छह माह से लंबित है। आसपास के बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी निभाते हुए आर्थिक तंगी के कारण हमारे घर के बच्चे ही कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। हमारे बाद बहाल शिक्षामित्र न केवल राज्यकर्मी बन गए, बल्कि 1500 से बढ़कर उनका वेतन 50 हजार के करीब हो गया, लेकिन हजार तरह के काम करते हुए भी हमारा मान...