गिरडीह, अगस्त 26 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। धर्म, परिवार, सामाजिक दायित्व और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित कर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। व्यक्ति को परिस्थितियों के अनुसार अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए आत्मकल्याण की दिशा में भी निरंतर पुरुषार्थ करना चाहिए। उक्त बातें मधुबन में साधनारत राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज मंगलवार को प्रवचन सभा मे बोल रहे थे। यह भी पढ़ें- Gridih News: परोपकार और परमार्थ की भावना ही वास्तविक कमाई : मुनि श्रीधर्म और व्यवहारिक जीवन में संतुलन गुणायतन में आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने कहा कि धर्म और व्यवहारिक जीवन में संतुलन के लिए विवेक, पुरुषार्थ ओर सही दृष्टिकोण आवश्यक है। केवल भवितव्यता के भरोसे निष्क्रिय बैठना उचित नहीं है। व्यक्ति को उपलब्ध साधनों औ...