चक्रधरपुर, मई 9 -- चक्रधरपुर। मदर्स डे पर जहां लोग अपनी मां के साथ तस्वीरें और यादें साझा कर रहे हैं, वहीं झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर की समाजसेवी नर्गिस खातून उन बच्चों के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी तस्वीर बन चुकी हैं, जिन्हें कभी अपने ही लोगों ने अकेला छोड़ दिया था। ऐसे कई बच्चे, जो मानसिक रूप से कमजोर या दिव्यांग हैं, उन्हें उनके परिवार वाले नर्गिस खातून के पास छोड़ जाते हैं। कई बार तो हालात इतने दर्दनाक होते हैं, कि बच्चे को छोड़ने के बाद परिवार अपना मोबाइल नंबर तक बदल देता है, ताकि दोबारा कभी उनकी जिम्मेदारी न उठानी पड़े। कुछ बच्चों को हॉस्टल में छोड़ दिया गया, तो कुछ को स्टेशन और सार्वजनिक जगहों पर बेसहारा हालत में पाया गया। यह भी पढ़ें- अंधविश्वास के अंधेरे से निकल बाहर बिष्णुगढ और बरही की घटना हमें सिखाती है मां के ममत्व और...
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