सिमडेगा, मई 29 -- सिमडेगा। छोटू बड़ाईक बांस आज भी हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। जन्म से लेकर विवाह तक, स्वाद से लेकर लेकर त्योहार तक और खेल से लेकर शव लेकर जाने वाले अंतिम यात्रा तक, हर पड़ाव पर बांस किसी न किसी रूप में लोगों के साथ खड़ा दिखाई देता है। गांवों की सुबह आज भी बांस की टोकरियों, गेड़ुआ भार, सूप और डाली के साथ शुरू होती है। हाट-बाजारों में बांस से बने सामान ग्रामीण जीवन की पहचान बनकर बिकते नजर आते हैं। खेतों की घेराबंदी, मचान, घरों की छत, मछली पकड़ने के उपकरण और घरेलू उपयोग की कई चीजें आज भी बांस से ही तैयार होती हैं। जिले में हॉकी और बांस का रिश्ता भी बेहद खास है। यहां के बच्चे शुरुआत में बांस से बनी हॉकी स्टिक से ही खेल सीखते हैं। मिट्टी के मैदानों में इसी देसी स्टिक से अभ्यास करते हुए जिले के दर्जनों खिलाड़ियों ने नेशनल...