रांची, सितम्बर 25 -- रांची, विशेष संवाददाता। अग्रिम जमानत के लिए खुद 10 लाख रुपये जमा करने का आश्वासन देना और बाद में उसी शर्त को हटाने की मांग करना एसबीआई के तत्कालीन अधिकारी मुरारी प्रसाद बर्णवाल को महंगा पड़ा। बैंक जालसाजी के मामले में आरोपी बर्णवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने 10 लाख रुपये जमा करने की शर्त हटाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि जब आरोपी ने स्वयं इस शर्त को स्वीकार किया था, तो अब उससे पीछे नहीं हट सकता। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। मुरारी प्रसाद बर्णवाल एसबीआई के रांची कॉमर्शियल ब्रांच में नवंबर 2003 से मई 2006 तक असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत था। इसके बाद जून 2006 से अक्तूबर 2007 तक उसने बोकारो कॉमर्शियल ब्रांच में सेवा दी। उसके कार्यकाल के दौरान बैंक से जुड़े कथित जालसाजी के मामले की ज...