औरैया, जनवरी 21 -- औरैया, संवाददाता। शहर और हाईवे पर बढ़ते ट्रैफिक जाम में एंबुलेंस का फंस जाना अब सिर्फ असुविधा का मामला नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी का क्रूर उदाहरण बनता जा रहा है। पिछले दिनों हमीरपुर हाईवे पर पांच घंटे तक जाम में फंसी एंबुलेंस में गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। वहीं लखनऊ में महज 200 मीटर की दूरी एंबुलेंस को तय करने में 11 मिनट लगे। दोनों घटनाएं बताती हैं कि एक-एक सेकंड का हिसाब मरीज की अंतिम सांसों से जुड़ा होता है, मगर सड़क पर व्यवस्था और शहरी सिविक सेंस दोनों इस समझ से काफी दूर हैं। ऐसे मामले दुर्लभ नहीं, पर सामने नहीं आते जिले के कई हिस्सों में ऐसे मामलों की फेहरिस्त लंबी है, जहां समय से अस्पताल पहुंच जाती एंबुलेंस तो शायद जान बच जाती। एंबुलेंस चालकों का कहना है कि शहरी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि हाईवे पर भी जेसीबी...
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