नई दिल्ली, जुलाई 30 -- दशकों से भयावह भूकंपों के साये में जीने वाले देश जापान ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है। जापान की सरकार ने देश की मौजूदा राजधानी टोक्यो के अलावा एक दूसरी राजधानी चुनने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जापानी संसद ने जुलाई में एक नया कानून भी पारित कर दिया है। हालांकि केस कदम का विरोध भी हो रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस कानून का उद्देश्य यह है कि किसी बड़े भूकंप की स्थिति में अगर टोक्यो तबाह हो जाए, तो देश की शासन व्यवस्था में कोई रुकावट न आए। लेकिन सवाल यह कि आखिर जापान को दूसरी राजधानी बनाने की नौबत ही क्यों आई? इसका जवाब है महाप्रलय। जी हां। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 30 सालों में टोक्यो महानगर क्षेत्र में 7 से भी ज्यादा तीव्रता की श्रेणी का एक भीषण भूकंप आ सकता है। अगर ऐसा होत...