जानवर खूंखार, विभाग लाचार... बिना गन कैसे होगा रेस्क्यू पार
फर्रुखाबाद कन्नौज, जुलाई 28 -- फर्रुखाबाद, संवाददाता। जिले में भले ही तेंदुए या बाघ जैसे बड़े हिंसक जानवरों का स्थायी बसेरा न हो, लेकिन गाहे-बगाहे इनकी दस्तक से ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बन जाता है। दो साल पहले खतवापुर और आसपास के क्षेत्रों में बाघ के हमले से दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे, जिनके घाव और खौफ आज भी ताजा हैं। इन सब के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि ऐसे खूंखार जानवरों से निपटने के लिए वन विभाग आज भी पूरी तरह मुस्तैद नहीं है। वनकर्मियों के पास जाल और पिंजरे तो हैं, लेकिन जानवरों को बेहोश करने वाली 'ट्रैंकुलाइजर गन' तक मौजूद नहीं है। जिले में बाघ एक नहीं कई बार देखे गए हैं। इसको लेकर ग्रामीण इलाकों में किसानों की नजर इनपर पड़ती रही है। 9 दिसंबर 2024 को शहर से सटे खतवापुर गांव में बाघ कहीं से आ हुआ था। किसानों की नजर प...
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