नई दिल्ली, अक्टूबर 9 -- जंतर-मंतर पर राजनीतिक प्रदर्शनों के बीच कानून व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों को बीते तीन दिनों में अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है। उग्र भीड़ पुरुषों के साथ महिला पुलिसकर्मियों से भी बदसलूकी करने से नहीं चूकी। प्रदर्शन की आड़ में की गई इस अराजकता को याद कर पुलिसकर्मी मायूस हो जाते हैं। उनका कहना है कि हम तो अपना फर्ज निभा रहे थे। हम जिनकी सुरक्षा के लिए वहां तैनात थे, वही हमारे लिए खतरा बन गए। दुर्व्यहार करने वालों को सोचना चाहिए कि वर्दी के पीछे उनके जैसा ही एक इंसान है। पीड़ित पुलिसकर्मियों के मुताबिक, शरीर पर आए जख्म तो कुछ दिनों में भर जाएंगे, लेकिन भीड़ के बर्ताव ने उनकी अंतरआत्मा को जो जख्म दिए हैं वह लंबे समय बाद भी न भर सके। पुलिसकर्मियों का आरोप है कि जानबूझकर उन्हें भीड़ में खींचकर लहूलुहान किया ग...