आगरा, फरवरी 8 -- आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आयोजित प्रथम डायोसिस सेमिनार में रविवार को आनंदमार्ग के वरिष्ठ आचार्य, आचार्य संपूर्णानंद अवधूत ने "तंत्र साधना और समाज पर उसका प्रभाव" विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तंत्र साधना मनुष्य के भीतर छिपे देवत्वबोध को जगाकर उसे परम चेतना से जोड़ने की प्रक्रिया है। आचार्य संपूर्णानंद ने कहा कि तंत्र वह आध्यात्मिक मार्ग है, जो साधक को संकीर्ण और पशुवत बंधनों से मुक्त कर उसके पूरे अस्तित्व को विस्तार की दिशा में ले जाता है। यह जाति-वर्ण, संप्रदाय, वेद, धर्ममत और मतवाद की बेड़ियों को तोड़कर आत्म-विकास के पथ पर आगे बढ़ाता है। उन्होंने बताया कि तंत्र का मूल उद्देश्य कुलकुंडलिनी की सुप्त शक्ति को जाग्रत कर उसे परम शिव से मिलाना है। तंत्र में मद, मात्सर्य, मत्स्य, क्रोध, अहंकार आदि दस प्रकार के भाव...
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