बेंगलुरु, सितम्बर 9 -- कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य के जातिगत सर्वे के निष्कर्ष लागू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दलितों, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की बात कही है। उनकी इस मांग ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस देशभर में जातिगत जनगणना के मुद्दे को लेकर बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। पार्टी का तर्क है कि प्रतिनिधित्व, आरक्षण और संसाधनों के बंटवारे से जुड़े फैसलों के लिए अलग-अलग समुदायों की वास्तविक संख्या का पता होना जरूरी है। लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस के सामने एक अलग ही सवाल खड़ा हो गया है। राज्य में जातिगत सर्वे पहले ही हो चुका है और उसकी नई रिपोर्ट नवंबर 2025 से तैयार है। ऐसे में सिद्धारमैया अब...