शाहजहांपुर, मार्च 21 -- शाहजहांपुर। डाउन सिंड्रोम दिवस के मद्देनजर विशेषज्ञों ने इस जन्मजात स्थिति को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच, सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से इससे प्रभावित बच्चे भी सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ चिकित्सक एवं प्रोफेसर डॉ. पूजा पाण्डेय ने बताया कि डाउन सिंड्रोम में बच्चे के शरीर में 46 की जगह 47 क्रोमोसोम होते हैं, जिससे उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ता है। इसका मुख्य कारण गर्भ में क्रोमोसोम का सही तरीके से अलग न होना है। उन्होंने बताया कि 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है। परिवार में पहले से ऐसे मामले होने पर भी जोखिम अधिक हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार अब गर्भावस्था के दौरान ब्लड टेस्ट ...