जयपुर, जून 29 -- जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस में इलाज के लिए पहुंचने वाले हजारों मरीजों की परेशानी बीमारी से ज्यादा एक साइन बन गया है। डॉक्टर जांच लिख देता है, मरीज बिल काउंटर तक पहुंच जाता है, लेकिन अगर जांच की कीमत दो हजार रुपए से ज्यादा है तो उसे पहले विभागाध्यक्ष (HOD) या यूनिट हेड की तलाश करनी पड़ती है। एक हस्ताक्षर के बिना न बिल बनता है और न ही जांच हो पाती है। यही वजह है कि हर दिन कई मरीज अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के अलग-अलग विभागों के चक्कर काटते नजर आते हैं। कोई HOD के कमरे के बाहर इंतजार करता है तो कोई यह पूछता फिरता है कि डॉक्टर कहां मिलेंगे। कई बार घंटों की मशक्कत के बाद भी हस्ताक्षर नहीं मिलते और मरीज मायूस होकर लौट जाता है। अब इस परेशानी को खत्म करने की कवायद शुरू हो गई है। एसएमएस अस्पताल प्रशासन ने राज्य सरकार को...