कोच्चि, जनवरी 29 -- केरल हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति-पत्नी के झगड़े के दौरान गुस्से में कहा गया "जा, मर जा" जैसे शब्द अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) का अपराध नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में आरोपी की मंशा (intention) निर्णायक होती है, न कि मृतक द्वारा उन शब्दों को कैसे महसूस किया गया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस सी. प्रथीप कुमार ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी का जानबूझकर आत्महत्या के लिए उकसाने का इरादा था। अदालत ने अपने आदेश में कहा, "महत्वपूर्ण यह है कि आरोपी की मंशा क्या थी, न कि मृतक ने उसे कैसे महसूस किया। इस मामले में 'जा, मर जा' जैसे शब्द एक तीखे मौखिक झगड़े के दौरान, आवेग और गुस्से में कहे गए...
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