मेरठ, मई 27 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे श्री शांतिनाथ विधान में आचार्य भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि मंदिर आत्म साधना का पवित्र स्थान है। मंदिर में घरेलू कामकाज तथा धन संपति के विचारों को त्याग कर धार्मिक भावनाएं ही मन में लानी चाहिए। व्यावहारिक कार्य और घरेलू चर्चा मंदिर में करना पाप है। धार्मिक मर्यादाओं के पालन से पुण्य बंध होने के साथ-साथ जीवन भी सफल होता है। उन्होंने कहा कि सूरज पश्चिम से उग सकता है सांप के मुंह में जहर की जगह अमृत हो सकता है। लेकिन जहां हिंसा है वहां धर्म नहीं हो सकता। यह भी पढ़ें- प्रभु की भक्ति करके जीवन में शांति मिलती है इससे पहले विधान के सातवें दिन मुख्य जिनालय में श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक किया। भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य विनोद कुमार जैन, संतोष देवी, सुमित जैन, विपुल जैन आदि को...