नई दिल्ली, जनवरी 7 -- नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता राजधानी दिल्ली के जिस इलाके में पत्थरबाजी की घटना सामने आई, वह क्षेत्र केवल एक भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि शांति, भाईचारे और इंसानियत के संदेश का प्रतीक रहा है। यह वही धरती है जहां सदियों पहले सूफी संतों ने प्रेम, सह-अस्तित्व और आपसी सद्भाव का पैगाम दिया। मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा बसाए गए ऐतिहासिक शाहजहांनाबाद के 14 दरवाजों में शामिल तुर्कमान गेट इसी इलाके की पहचान है। यह गेट सूफी संत हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी के नाम पर रखा गया, जिनकी दरगाह आज भी लोगों को जोड़ने का काम करती है। हर साल यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद भी इसी साझी विरासत की गवाह है। करीब ढाई सौ वर्ष पुरानी इस मस्जिद का निर्माण मुगल काल में हजरत शाह फैज-ए-इल...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.