नई दिल्ली, अगस्त 10 -- हर साल 15 अगस्त को लाल किले के लाहौरी गेट पर भारतीय आन-बान और शान के प्रतीक तिरंगा को फहराया जाता है। क्या आपको मालूम था कि लाहौरी गेट पर तिरंगा फहराने का हक केवल भारत के प्रधानमंत्री को है? पढ़िए लाल किले के लाहौरी गेट के 5 अनसुने किस्से, जो गुलामी से लेकर आजाद भारत की कहानियों को समेटे हुए हैं।'लाहौरी गेट' नाम पडने का किस्सा सबसे पहला ख्याल यही आता है कि लाल किले के लाहौरी गेट के नाम में लाहौर शब्द क्यों और कहां से आया। दरअसल मुगल दौर में यहां से निकलने वाला रास्ता सीधे लाहौर को जाता था। मुगल काल में इसी रास्ते से शाही जुलूस निकलते थे और यह दरवाज़ा दिल्ली की रौनक और ताकत का प्रतीक था। इस कारण इसके नाम में लाहौर शब्द जुड़ा है। वर्तमान में लाहौर पाकिस्तान का हिस्सा है। यह भी पढ़ें- मुगलों, अंग्रेजों और नेहरू को खिला...
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