देवघर, अगस्त 10 -- देवघर। पूर्वी भारत में देवघर को भारतीय इतिहास का एक केंद्र माना जा सकता है, जहां एक ही साथ शैव, शाक्त और वैष्णव सम्प्रदाय के उन्नयन के साथ बौद्ध साधना की परंपरा भी पनपती रही। डॉ. मोहनानंद मिश्र की मानें तो वैदिक साहित्य में इस स्थान की चर्चा नहीं है, किंतु वेदोत्तर साहित्य में वैद्यनाथ क्षेत्र का उल्लेख है। तांत्रिक और पौराणिक साहित्य में भी इसका वर्णन है। कुब्जिकातंत्र, ज्ञानार्णव तंत्रसार, कालीतंत्र, शक्ति संगम तंत्र और महाकाल संहिता में इस स्थान की प्रशस्ति है।

धार्मिक महत्व पुराणों में शिव पुराण, मत्स्य पुराण और काली पुराण इसे धार्मिक इतिहास की महत्ता से ओतप्रोत करता है। देवी भागवत भी इसकी प्रशस्ति को महत्व देता है। वैद्यनाथधाम का ही दूसरा नाम देवघर है। यहां द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ कामनालिंग वैद्यनाथ ...