जहां कभी थीं कटीली झांड़ियां वहां अब हो रही परवल की खेती
गंगापार, जुलाई 3 -- यदि मनुष्य में कुछ करने की ललक व जज्बा हो, तो मेहनत के बल पर सब कुछ पाया जा सकता है। कुछ इसी तरह का कार्य बिहार छबुआ से पहुंचे रामपाल, राम मनोरथ सहित अन्य श्रमिकों ने कर दिखाया। मेजा के कछार में जहां कभी कटीली झाड़ियां उगी पड़ी थी, किसानों ने कटीली झाड़ियों की वजह से खेती करना छोड़ दिया था। इसी बंजर पड़ी जमीन को मेहनतकश लोगों ने दस हजार प्रति बीघा जमाबंदी पर लेकर परवल, नेनुआ, कद्दू, लौकी सहित विभिन्न प्रकार की हरी सब्जी की खेती कर लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।
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