लखनऊ, दिसम्बर 21 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता जहरीले जीवों के काटने व जहरीला पदार्थ पीने वाले लोगों में गुर्दा फेल होने समेत कई जोखिम हो सकते हैं। शरीर में जहर पहुंचते ही गुर्द को रक्त प्रवाह करने वाली धमनियों प्रभावित होती है। इससे पेशाब कम होना, शरीर में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ना सहित कई जटिलताएं गुर्दे पर असर डालती हैं। उपचार में देरी पर ये जानलेवा हो सकता है। यह बातें नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने रविवार को इंडियन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें वार्षिक अधिवेशन के समापन पर कहीं। उन्होंने बताया कि रोगी को तुरंत उपचार देकर जहर को नियंत्रित करने के साथ इलेक्ट्रोलाइट संतुलन और जरूरत पड़ने पर डायलिसिस करनी पड़ती है। अधिवेशन के आयोजन सचिव डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि गुर्दा रोगियों में खतरा अधिक होता है। गुर्दा की ...
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