हजारीबाग, अप्रैल 1 -- हजारीबाग, हमारे प्रतिनिधि। हजारीबाग जिले में जलावन कोयले का कारोबार एक जटिल सामाजिक-आर्थिक मुद्दे के रूप में उभर कर सामने आया है। जिले के बड़कागांव, चरही, केरेडारी और केदला क्षेत्र में पांच हजार से अधिक लोग कोयले की ढुलाई से जुड़े हुए हैं। रोजगार के सीमित अवसरों के बीच ये मजदूर साइकिल और मोटरसाइकिल के जरिए 40 से 100 किलोमीटर तक की दूरी तय कर कोयला बाजार तक पहुंचाते हैं। एक चक्कर में उन्हें करीब 500 से 600 रुपये की आमदनी हो जाती है, जो उनके परिवार के भरण-पोषण का मुख्य आधार है। यह जलावन कोयला हजारीबाग शहर से लेकर जीटी रोड, रांची-पटना मार्ग, गिरिडीह और विष्णुगढ़ समेत विभिन्न प्रखंडों में खपता है। एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती कीमत और अनियमित आपूर्ति के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों, ढाबों और छोटे होटलों में इसकी मांग लगातार बढ़...