सुल्तानपुर, जून 24 -- सुलतानपुर, संवाददाता। जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में जारी दस दिवसीय 'जलसा शोहदा-ए-इस्लाम' की छठी नशिस्त (बैठक) अकीदत और रूहानियत के माहौल में कामयाबी के साथ सम्पन्न हुई। जलसे में उलमा-ए-किराम ने सहाबा-ए-किराम की फज़ीलत, मुहर्रम की अहमियत और इस्लामी अक़ीदों की इस्लाह पर विस्तृत प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद क़सीम क़ासमी ने अपने खिताब में कहा कि "नबी-ए-करीम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तमाम सहाबा रुश्द व हिदायत के आसमान के दरख़्शंदा सितारे हैं और रिसालत के गुलसितां के महकते हुए फूल हैं।" उन्होंने कहा कि मदह-ए-सहाबा और दिफ़ा-ए-सहाबा हर मुसलमान की जिम्मेदारी है तथा सहाबा-ए-किराम की मुहब्बत ईमान का अहम हिस्सा है। यह भी पढ़ें- जलसा शोहदा-ए-इस्लाम की छठी नशिस्त संपन्न, सहाबा-ए-किराम की सीरत पर डाली गई...