गंगापार, अप्रैल 24 -- कस्बा भारतगंज के जुबेरनगर में गुरुवार को बाद नमाज़-ए-ईशा आयोजित जलसा-ए-मिलाद में अकीदत, मोहब्बत और इश्क-ए-रसूल का दिलकश नज़ारा देखने को मिला। महफ़िल उस वक्त अपने उरूज पर पहुंच गई, जब शायर एहसान शाकिर आजमगढ़ी ने कलाम "सारे आलम में मोहब्बत की घटा छाई है, आप आए आका तो ज़माने में बहार आई है." तरन्नुम में पेश किया। उनके अशआर पर हाज़रीन झूम उठे और पूरा माहौल इश्क-ए-रसूल की खुशबू से महक उठा। इसी कड़ी में हाफिज खुर्शीद ने "सर के बल होके चलना अदब से, वो दयारे हबीबे खुदा है."पेश कर महफ़िल को और भी भावुक बना दिया। उनके कलाम ने हाज़रीन के दिलों को गहराई से छू लिया। शायर सेराज रज़वी, साबित अली, असद रज़ा राईन और सैफ रज़ा नूरी ने भी नातिया कलाम से समां बांध दिया। एक से बढ़कर एक पेशकशों ने महफ़िल को देर रात तक रूहानी कैफियत में डूबो...
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