कानपुर, नवम्बर 7 -- कानपुर। जलवायु परिवर्तन से वर्ष 2050 तक बारिश आधारित धान और गेहूं की पैदावार में 20 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इसलिए मिट्टी की गुणवत्त्ता सुधारना जरूरी है, जिसके लिए मृदा एवं पारिस्थितिकी पुनरुद्धार आधारित कृषि पद्धतियां अपनाने, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की जरूरत है। यह बात टिकाऊ खेती और जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे आईआईटी समेत देशभर के वैज्ञानिकों ने कही। उन्होंने अधिकारी व मंत्रियों के माध्यम से सरकार को इस संकट के प्रति चेताया भी है। आईआईटी कानपुर की ओर से क्षेत्रीय ग्रामीण-भारत शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें आईआईटी समेत देशभर के विशेषज्ञों ने 'जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और उनसे निपटने के लिए मृदा एवं पारिस्थितिकी पुनरुद्...