पलामू, अप्रैल 22 -- मेदिनीनगर, संवाददाता। पृथ्वी दिवस-2026 करीब आते हुए पलामू जिले में भी जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव प्रभावी रूप से दिख रहा है। जिले की जीवन दायिनी नदी कोयल की धाराएं सूख चली है। जंगल में खनन कार्य बढ़ने व मानवीय हस्तक्षेप में बढ़ोतरी होने के कारण नीलगाय के बाद अब बारहसिंघा भी शहरी क्षेत्र में पहुंच जा रहे हैं। इस विकट परस्थिति में जलवायू परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर प्रयास तेज की जरूरत महसूस की जा रही है। पृथ्वी दिवस को इस वर्ष मनाने के लिए, हमारी शक्ति, हमारा ग्रह, थीम रखा गया है। यह भी पढ़ें- विश्व पृथ्वी दिवस : झारखंड के वन क्षेत्र में 1.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी यह लोगों को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा। पलामू जिले की अर्थव्यवस्था अब भी 80 फीसदी तक खे...
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