जल, जंगल, जमीन आदिवासी संस्कृति सभ्यता व पारंपरिक ऐतिहासिक धरोहर : सांसद
दुमका, मई 16 -- शिकारीपाड़ा, प्रतिनिधि।सरसाजोल स्थित शिकारीपाड़ा डिग्री महाविद्यालय में शुक्रवार को जल, जंगल, जमीन को लेकर राष्ट्र सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद दुमका सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि जल, जंगल व जमीन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, हम सब का जीवन यापन इसी पर निर्भर है। कहा झारखंड राज्य का निर्माण जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए ही हुआ है। वीर बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू ,फूलो झानो व पहाड़िया समुदाय जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए बड़े-बड़े आंदोलन किए। जल, जंगल, जमीन भी आदिवासी संस्कृति सभ्यता एवं पारंपरिक ऐतिहासिक धरोहर का आधार है। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए अपनी जीवन समर्पित करने वाले बिरसा मुंडा आज भी इसकी पहचान के रूप में धरती आबा के रूप में प्रतिष्ठित हैं। भारत...
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