नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- जयपुर से बेनकाब हुआ 400 करोड़ रुपए का साइबर घोटाला सिर्फ ठगी नहीं, बल्कि "डिजिटल हाइजैकिंग" का ऐसा मॉडल है जिसने देशभर के एक्सपोर्ट सिस्टम की सुरक्षा पर सीधा हमला किया है। यह कहानी है उस गैंग की, जिसने बिना ऑफिस में घुसे, बिना ताला तोड़े-सैकड़ों कंपनियों की पहचान चुरा ली और सरकारी छूट को अपने खातों में बहा दिया।स्टेप-1: पहचान की हत्या, फर्जी DSC से खेल की शुरुआत इस गैंग ने सबसे पहले कंपनियों के डायरेक्टर्स की डिजिटल पहचान को निशाना बनाया। फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) तैयार किए गए। यही DSC असली डायरेक्टर की "डिजिटल चाबी" होती है-और इसी चाबी की डुप्लीकेट कॉपी बनाकर अपराधियों ने सिस्टम में एंट्री ली। यह भी पढ़ें- जयपुर में 400 करोड़ का साइबर घोटाला, फर्जी डिजिटल सिग्नेचर बनाकर हड़पे ...