मुजफ्फरपुर, जुलाई 31 -- कांटी। साहित्य भवन में शुक्रवार को जयंती पर मुंशी प्रेमचंद को याद किया गया। नूतन साहित्यकार परिषद के अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह चंद्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद दबे, कुचले, अपमानित, शोषित किसानों की आवाज थे। उन्होंने हिन्दी कथा साहित्य को एक नई दिशा दी। स्वराजलाल ठाकुर ने कहा कि प्रेमचंद ने सामाजिक विषमताओं को उजागर कर लोगों को झकझोरा व हिन्दी साहित्य से आम पाठकों से जोड़ा। परशुराम सिंह, चंद्रकिशोर चौबे, रामेश्वर महतो, नंदकिशोर ठाकुर, रामेश्वर सिंह, महेश कुमार, रजनीश कुमार, आदर्श सिंह राजपूत आदि थे। यह भी पढ़ें- Bhagalpur News: जमुई: प्रेमचंद यथार्थवादी युग के महान शिल्पिकर : प्राचार्य यह भी पढ़ें- प्रेमचंद की वर्तमान महत्ता पर संगोष्ठी यह भी पढ़ें- समाज की आत्मा के सजग चितेरे थे मुंशी प्रेमचन्द

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