जमुई: प्रजापति समाज कैसे कर रहा है अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष
भागलपुर, सितम्बर 13 -- झाझा, निज प्रतिनिधि बड़े पैमाने पर प्लास्टिक, फाइबर व अन्य मिश्रित धातुओं से निर्मित वस्तुओं का उत्पादन हुआ। इस वजह से घर-घर तक इनकी पहुंच से जहां एक ओर कुम्हार समुदाय के पुश्तैनी कारोबार को पिछले कुछ वर्षों से भारी क्षति का सामना करना पड़ा है।वहीं दूसरी ओर चीन द्वारा निर्मित वस्तुओं का आयात और बड़े पैमाने पर भारत के बाज़ारों में मौजूदगी भारतीय कुम्हारों के व्यवसाय में आर्थिक पिछड़ेपन का एक प्रमुख कारण रहा हैं। पुश्तैनी पेशे के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है प्रजापति समाज के पास पहले कुम्हार समुदायों में दुर्गापूजा, दीपावली और छठ जैसे व्रतों में मिट्टी से निर्मित वस्तुओं के निर्माण की जो तत्परता और खुशी दिखाई पड़ती थी। अब उसमें आसमान-ज़मीन का अंतर हो चुका है। सामान बनाने के अनुकूल मिट्टी की कमी, कच्ची मिट्टी की वस्तुओं को पक...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.